
चाय की दुकानों, ढाबों और जूस सेंटरों पर प्लास्टिक व थर्मोकोल कप की जगह पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के कुल्हड़ों के उपयोग को बढ़ावा देना।
कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और घरों में ठंडे पानी के भंडारण के लिए स्वास्थ्यवर्धक मिट्टी के मटकों और बोतलों का उपयोग सुनिश्चित करना।
पॉलीथिन का सबसे टिकाऊ विकल्प सूती कपड़े के थैले हैं। सब्जी मंडियों और मुख्य बाजारों में 'थैला बैंक' स्थापित कर लोगों को थैले उपलब्ध कराना।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सिलाई केंद्रों की महिलाओं को जोड़कर पुराने व नए सूती कपड़ों से थैले सिलवाना, जिससे उन्हें घर बैठे रोजगार मिले।
स्थानीय कुम्हारों को थोक में ऑर्डर देकर उनकी पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करना और प्रशासन के सहयोग से प्रमुख चौराहों पर 'कुल्हड़ चाय' अनिवार्य करवाना।

धार्मिक आयोजनों, मेलों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता रैलियों के माध्यम से प्लास्टिक और पॉलीथिन के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता फैलाना।