सड़क पर घूम रही बीमार, बूढ़ी और लाचार गायों की सुरक्षा के लिए आधुनिक, सुरक्षित गौशालाओं का निर्माण करना और उन्हें संरक्षित करना।
भारतीय स्वदेशी नस्लों (जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा आदि) के संरक्षण, संवर्धन और उनके विकास को बढ़ावा देने के विशेष प्रयास।

दूध के अलावा गाय के गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद (Organic Fertilizer), कीटनाशक, दीये, गमले और आयुर्वेदिक औषधियां तैयार करना।
गौशालाओं को केवल दान पर निर्भर न रहने देना; इसके लिए वहां बायोगैस प्लांट स्थापित करना और पर्यावरण-अनुकूल धूपबत्ती व उपले बेचना।
बीमार या दुर्घटनाग्रस्त गोवंश के इलाज के लिए 24 घंटे पशु चिकित्सकों की उपलब्धता और मोबाइल एम्बुलेंस सेवा सुनिश्चित करना।
गायों के लिए पौष्टिक चारे की कमी को दूर करने हेतु बंजर या पंचायत की चिन्हित भूमि पर व्यवस्थित रूप से चरागाह विकसित करना।