
कांवड़ मार्ग और प्रवेश द्वारों पर प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में कांवड़ियों को निःशुल्क कपड़े/जूट के थैले वितरित करना तथा जलपान की व्यवस्था करना।
संस्था के स्वयंसेवकों द्वारा गंगा घाटों पर निरंतर सफाई अभियान चलाना और श्रद्धालुओं को गंगा जी में प्लास्टिक या कपड़े न बहाने के लिए प्रेरित करना।

सार्वजनिक भूमियों और मठ-मंदिरों के आसपास पीपल, बरगद, नीम, बेलपत्र, आंवला और तुलसी जैसे 'देव वृक्षों' का रोपण एवं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।

भंडारों और सेवा शिविरों में थर्माकोल व प्लास्टिक की जगह पत्तलों (दोना-पत्तल) और मिट्टी के कुल्हड़ों के उपयोग को अनिवार्य करने हेतु जागरूकता फैलाना।
कांवड़ मार्ग व संवेदनशील स्थलों पर सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन स्थापित करना तथा शिविरों के जैविक कचरे से खाद (Composting) निर्माण।
पौधों को सिर्फ लगाना ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक ट्री-गार्ड द्वारा सुरक्षा और नियमित पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की सामुदायिक पहल।